वो 6 गलतियां, जिनके चलते रिजेक्ट हो सकता है आपके हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम

परिवार के किसी सदस्य को हुई कोई गंभीर बीमारी एक आम मध्यमवर्गीय परिवार को गरीब बनाने के लिए पर्याप्त होती है

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देश में इलाज की व्यवस्था जितना बेहतर हो रही है, उतनी ही महंगी भी होती जा रही है। परिवार के किसी सदस्य को हुई कोई गंभीर बीमारी एक आम मध्यमवर्गीय परिवार को गरीब बनाने के लिए पर्याप्त होती है। ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस परिवारों के लिए बेहद जरूरी हो जाता है। लेकिन कई बार हेल्थ इंश्योरेंस मौजूद होने के बावजूद क्लेम रिजेक्ट हो जाता है। कुछ मामलों में बीमा कंपनियाें की बदमाशी होती है, जिसके खिलाफ आप बीमा नियामक इरडा और अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। लेकिन, ज्यादातर मामलों में पॉलिसी होल्डर की ओर से की गई मामूली गलतियां इस रिजेक्शन का कारण होती हैं। हम आपको ऐसी ही छह गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनसे आप बचे रहेंगे तो आपका क्लेम कभी रिजेक्ट नहीं होगा।  

पॉलिसी समय पर रिन्यू न करना : ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी एक साल के लिए होती हैं। उन्हें हर साल रिन्यू कराना होता है। कई बार, पॉलिसीधारकों को याद नहीं रहता और उन्हें इसका केवल तब पता चलता है, जब उनके दावे खारिज हो जाते हैं। यदि पॉलिसी समाप्त हो गई है तो बीमा कंपनी दावे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि डायरी बनाकर पॉलिसी रिन्यू की तारीख याद रखें और उसे रिन्यू कराएं। ज्यादातर बीमा कंपनियां पॉलिसी रिन्यू की आखिरी तारीख बीतने के बाद भी 15 दिनों की छूट अवधि प्रदान करती हैं, जिसके दौरान पॉलिसी रिन्यू करा सकते हैं। हालांकि, इस ब्रेक-इन अवधि के दौरान आने वाले किसी भी क्लेम को बीमा कंपनी स्वीकार नहीं करेगी। 

किसी मौजूदा बीमारी को छुपाना: पॉलिसी लेते समय पहले से हुई बीमारियों जैसे कि ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज पहले हुआ कोई ऑपरेशन आदि का खुलासा करना जरूरी होता है। पॉलिसी रिन्यु कराते समय किसी भी नई चिकित्सा स्थिति या बीमारी का खुलासा करना भी महत्वपूर्ण है। यदि आप धूम्रपान करते हैं (भले ही कभी-कभी) तो इसकी भी जानकारी साझा करनी चाहिए। यदि आपने पॉलिसी लेते समय इसमें से कुछ छुपाया है और क्लेम के दौरान कंपनी को इसकी जानकारी लग गई तो वह आपका क्लेम खारिज कर देगी।   

वेटिंग पीरियड का ध्यान न देना: ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस में कुछ गंभीर बीमारियों कावर शुरू होने में एक वेटिंग पीरियड होता है। उदाहरण के लिए कोई पॉलिसी कैंसर को कवर करेगी, लेकिन पॉलिसी शुरू होने के 3 साल बाद। इसका मुख्य मकसद ऐसे मामलों को रोकना होता है, जहां पहले से हुई बीमारी का इलाज कराने के लिए बीमा लिया जा रहा हो। पॉलिसी लेते समय वेटिंग पीरियड और इसके लिए निर्धारित बीमारियों को जरूर ध्यान से पढ़ लें।  

एक्सक्लूजन की सूची न पढ़ना: सभी बीमा पॉलिसी कवरेज और एक्सक्लूजन की सूची प्रकाशित करते हैं। यदि पॉलिसीधारक किसी ऐसी बीमारी के खिलाफ दावा उठाता है जो एक्सक्लूजन की सूची में है, तो उसमें क्लेम खारिज हो जाता है। इसलिए, पॉलिसी खरीदते समय पॉलिसी द्वारा क्या कवर नहीं किया गया है, यह जानने के लिए एक्सक्लूजन की सूची ध्यान से पढ़ें। 

देरी से क्लेम करना: बीमा पॉलिसी एक निर्धारित समयसीमा तय करती हैं, जिसके भीतर पॉलिसीधारक को क्लेम फाइन कर देना चाहिए। आमतौर पर पॉलिसी क्लेम दायर करने के लिए अस्पताल से छुट्टी की तारीख से 60 से 90 दिनों की अवधि देती है। यदि इस समयसीमा के बीत जाने के बाद क्लेम किया जाएगा तो वह खारिज हो सकता है। सबसे बेहतर तो यही होगा कि अस्पताल से छुट्टी के तुरंत बाद क्लेम फाइल कर दिया जाए। 

कम या गलत दस्तावेज: कई बार क्लेम लापता या गलत दस्तावेजों के कारण खारिज हो जाते हैं। पॉलिसीधारक को किसी भी समस्या से बचने के लिए सभी मूल दस्तावेज, लैब रिपोर्ट, डॉक्टर के परामर्श पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों को विधिवत भरे हुए दावे के फॉर्म के साथ जमा करना चाहिए।