टैक्स के दायरे में नहीं आ रहे हैं तो भी इनकम टैक्स रिटर्न क्यों भरना चाहिए

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अगर आपकी आय टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो आपके लिए आयकर रिटर्न फाइल करना जरूरी नहीं होता है। लेकिन, फिर भी आपको रिटर्न फाइल करना चाहिए। ऐसा करने के कई फायदे आपको मिलते हैं। हम आपको आईटीआर फाइल करने के 5 फायदे बताने जा रहे हैं।

  1. आपकी आय का प्रमाण
    अगर आप बिजनेस करते हैं या नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो निश्चित रूप से आयकर रिटर्न आपको आपके बिजनेस में मदद करेगा। यह आपके आय के स्तर को प्रमाणित करता है, जिससे बैंक, सरकारी उपक्रमों इत्यादि से आपको डील करने में आसानी होती है। अगर आप किसी सरकारी विभाग से कॉन्ट्रेक्ट हासिल करना चाहते हैं तो आपको पिछले पांच सालों का इनकम टैक्स रिटर्न देना पड़ता है।
  2. लोन मिलने में आसानी
    कार लोन, होम लोन, क्रेडिट कार्ड या इसी तरह की अन्य सुविधा लेना हो तो बैंक ग्राहक से 2-3 साल का इनकम टैक्स रिटर्न मांगते हैं। अगर आपके पास आईटीआर की कॉपी है तो आपको लोन मिलना बहुत आसान हो जाता है। बैंक ग्राहक के इनकम टैक्स रिटर्न से ही उनके कर्ज लेने-चुकाने की क्षमता का आकलन करते हैं। I
  3. नुकसान की भरपाई का मौका
    अगर आप शेयर बाजार में निवेश करते हैं, बिज़नेस या प्रॉपर्टी में डील करते हैं और उसमें घाटा होता है तो समय पर आईटीआर भरने से आप भविष्य में होने वाले इस तरह के लाभ से घाटे को समायोजित (एडजस्ट) कर सकते हैं और टैक्स बचा सकते हैं।
  4. बड़े लेन-देन में जरूरी
    अगर आप हाई वैल्यू ट्रांसेक्शन करते हैं तो आईटीआर आपके लिए मददगार साबित होता है। समय पर आईटीआर फाइल करते रहने से प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने, बैंक में बड़ी रकम जमा करने, म्यूचुअल फंड में बड़े निवेश के बाद आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस आने का खतरा नहीं होता। इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित आय से आपके वित्तीय व्यवहार की तुलना कर आपके लेन देन को जांच​ लिया जाता है।
  5. टीडीएस रिफंड के लिए आवश्यक
    आपकी आमदनी करयोग्य नहीं है, फिर भी हो सकता है कि आपको भुगतान पर करने टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) कटा हो। अगर आपकी कमाई पर किसी ने टीडीएस काटा है तो उसे वापस लेने के लिए आईटीआर फाइल करना जरूरी है। आप आयकर रिटर्न भर कर टीडीएस रिफंड ले सकते हैं।

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